अल्ताफ खान, धार।
धार नगर में इंसानियत और कौमी एकता की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली, जब मुस्लिम युवकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक हिंदू महिला की जान बचाई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में मानवता की मिसाल कायम कर दी है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना 4 अक्टूबर की रात करीब 3 बजे की है। बस स्टैंड के पीछे स्थित श्रीमाया होटल के सामने एक युवती ललिता ने अज्ञात कारणों के चलते कुएं में छलांग लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया।
रात का समय था और चारों ओर अंधेरा पसरा हुआ था। तभी वहां से गुजर रहे कुछ युवक — सोहेल बिल्ला, टायसन बेग, वसीम क़ाज़ी, सोनू रघुवंशी, शब्बर बेग, लक्की बेग, गोलू बनदिया, साहिल मंसूरी, अबुज़ार खान और फैज़न शेख — ने कुएं की दिशा से बच्चों के रोने और लोगों के चिल्लाने की आवाज़ सुनी। वे तुरंत मौके पर पहुंचे और देखा कि युवती पानी में डूब रही है।
हालांकि उपस्थित युवक कोई प्रशिक्षित तैराक नहीं थे, लेकिन उन्होंने बिना देर किए युवती को बचाने का निर्णय लिया। सोहेल बिल्ला ने तुरंत श्रीनगर कॉलोनी निवासी परवेज शेख को बुलाया। परवेज मौके पर पहुंचे और बिना एक पल गंवाए कुएं में छलांग लगा दी।
कुआं गहरा था और उसमें बिजली की अर्थिंग की तारें भी चल रही थीं, जिससे खतरा और बढ़ गया था। बावजूद इसके, परवेज ने हिम्मत नहीं हारी और संघर्ष करते हुए ललिता को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
घटना की जानकारी फैलते ही स्थानीय लोगों ने इन युवकों की बहादुरी की सराहना की और कहा कि इन मुस्लिम युवकों ने जो किया, वह इंसानियत की सच्ची तस्वीर है।
धार में यह घटना आज मानवता, भाईचारे और कौमी एकता का प्रतीक बन गई है। परवेज शेख और उनके साथियों ने साबित किया कि जब बात जान बचाने की हो, तो धर्म की दीवारें नहीं रहतीं — सिर्फ इंसानियत बाकी रहती है।
धार के लोगों का कहना है कि इन नौजवानों ने जो साहस और प्रेम दिखाया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बन जाएगी।

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