(झाबुआ। नरेंद्र राठौड़ )जिला अस्पताल आए दिन चर्चाओं में बना रहता है। यहां पर 34 सफाई कर्मचारी व 12 गार्ड सुरक्षा व्यवस्था में लगे हुए हैं। इन कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलता है। साथ ही कम वेतन मिलने के कारण गुरुवार सुबह समस्त कर्मचारी हड़ताल पर उतर गए। कर्मचारियों का कहना था कि दो माह से उन्हें वेतन नहीं मिला है। ठेकेदार द्वारा तानाशाही रवैया अपनाया जाता है। समय पर वेतन नहीं मिलने से उन्हें दिक्कतें आ रही है। वेतन भी कम दिया जाता है।
गुरुवार सुबह गार्ड व सफाई कर्मचारी कम वेतन मिलने व समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण परेशान दिखाई दिए। उन्होंने सामूहिक रूप से हड़ताल कर दी। कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें मात्र छह हजार 700 रुपये वेतन दिया जाता है। अगर शिकायत करते हैं तो ठेकेदार द्वारा काम से हटा देने की बात कही जाती है। इतने कम वेतन में कैसे काम किया जाए। वेतन भी दो माह से नहीं जमा किया गया। अगर वेतन मांगा जाता है तो ठेकेदार द्वारा जिला अस्पताल में नहीं आने की बात कही जाती है। इन्हीं बातों को लेकर कर्मचारी पिछले दो माह से परेशान है।
राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ।
कर्मचारियों ने बताया कि ठेकेदार को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। इसलिए अधिकारी भी उस पर कार्रवाई नहीं करते। छोटे कर्मचारियों का नुकसान लगातार हो रहा है। कई बार अधिकारियों से भी शिकायत की गई, लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला। ठेकेदार द्वारा निम्न स्तर की सामग्री सफाई व्यवस्था में इस्तेमाल की जाती है और बिल बढ़ा-चढाकर पेश कर दिए जाते हैं। सबसे अधिक नुकसान छोटे कर्मचारियों को ही होता है।
नहीं है पर्याप्त इंतजाम।
सफाई कर्मचारियों को कोरोना संक्रमण के इस दौर में जिला अस्पताल में कार्य करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा चाहिए, लेकिन कर्मचारियों को न तो दस्ताने दिए जाते हैं, न ही किसी प्रकार की किट उन्हें पहनने के लिए उपलब्ध कराई जाती है। स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी स्वयं की जवाबदारी पर कार्य कर रहे हैं। ऐसे में अगर कोई कर्मचारी बिमार पड़ जाए, तो कोई भी अधिकारी व ठेकेदार जवाबदारी नहीं लेता है। पिछले एक कर्मचारी बिमार पड़ गया था। उसका उपचार अन्य अस्पताल में करवाया गया और वह भी स्वयं के खर्चे पर।
तीन घंटे बाहर खड़े रहे कर्मचारी।
तीन घंटे तक जिला अस्पताल के मुख्य द्वार पर कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर खड़े रहे। कई आला अधिकारियों को उन्होंने फोन लगाया, लेकिन किसी ने भी उनकी मांग नहीं सुनी। तीन घंटे बाद जिला अस्पताल के अधिकारियों व चिकित्सकों की समझाइश के बाद काम पर लौटे।
जिला अस्पताल में सफाई और सिक्योरिटी का काम आउटसोर्स के माध्यम से होता है। यहां 30 से ज्यादा कर्मचारी नियुक्त हैं। ये कर्मी आउटसोर्स कंपनी कामथेन द्वारा लगाए गए हैं। कई वर्षों से इस कंपनी का ठेका है और आए दिन कर्मियों को पूरा वेतन नहीं देने, पीएफ जमा नहीं करने और संसाधन उपलब्ध नहीं कराने की शिकायतें होती आई हैं।
अब भी इसी तरह की शिकायतें हैं। गुरुवार को अस्पताल में कार्यरत 34 से ज्यादा कर्मियों ने काम बंद कर दिया। उनका आरोप है कि तय वेतन नहीं दिया जा रहा है। प्रोविडेंट फंड का हिसाब और रसीद भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही। कर्मचारियों को पता नहीं है कि उनके वेतन में कितनी कटौती हो रही है और उनके पीएफ खाते में कितना पैसा जमा है। कामथेन सिक्योरिटी सर्विस इंदौर के पास ठेका है। सुरक्षाकर्मी विनोद, प्रमीला, रानी, थॉमस, शरमा, सुभाष, रघु, संगीता और सफाईकर्मी अजय, संजय, जितेंद्र, सुनील, गंगा, राहुल, ललिता, बीना, विनोद, चंदा सहित अन्य कर्मचारी काम छोड़कर अस्पताल से बाहर आ गए। इन्होंने सिविल सर्जन के नाम ज्ञापन दिया और कलेक्टर के नाम भी।
सिविल सर्जन को दिए गए ज्ञापन में इन कर्मियों ने आरोप लगाया, जिला चिकित्सालय द्वारा हर कर्मचारी के लिए कंपनी को 9690 रुपए प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है। इसके बदले कर्मचारियों को कंपनी सिर्फ 6700 रुपए दे रही है। बाकी राशि कटौत्रा के नाम पर नहीं देते। पूर्व में भी कंपनी ने कर्मचारियों के वेतन से कटौती की, लेकिन पीएफ जमा नहीं किया था। इन कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि एक सप्ताह में वेतन का हिसाब नहीं मिलता है तो हड़ताल करेंगे।
दो साथियों की मौत हो गई।
विरोध करने वाले कर्मचारियों ने बताया, कोरोना काल में जान की परवाह किए बगैर हमने काम किया। कोरोना के वार्ड में ड्यूटी दी, जहां लोग जाने में डरते थे। कोरोना से मृत मरीजों के शवों को हमारे साथी लेकर जाते थे। ऐसे एक कर्मचारी का निधन हो गया। एक अन्य की जान भी गई। अब उनके परिवार को कोई बड़ी मदद नहीं मिली।
कंपनी से मांगा है जवाब।
सिविल सर्जन डॉ.बीएस बघेल का कहना है, कई बार कंपनी वालों से कहा है कि सफाई व्यवस्था ठीक कराएं। बघेल ने बताया, अभी भी कर्मचारियों ने शिकायत की है। कंपनी को नोटिस देकर जवाब मांगा है। वेतन जैसे मामलों में पारदर्शिता होना चाहिए।
सिविल सर्जन डा.बीएस बघेल का कहना है कि कई बार ठेकेदार को नोटिस दिया जा चुका है। पिछले दिनों भी उन्हें नोटिस दिया गया था। जिला अस्पताल में इस्तेमाल करने वाली सामग्री दुरुस्त देने की बात कही गई है। अगर फिर भी बात नहीं बनती है, तो ठेकेदार को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
भुगतान नहीं हुआ।
इस संबंध में ठेकेदार द्विवेदी का कहना है कि पिछले दो माह से उसे भुगतान नहीं हुआ है। इसीलिए दिक्कतें आई है। कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान दिया जाएगा।

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