भगवान की भक्ति नहीं कर पाए मगर भगवान के भक्त के पैर पकड़ने से मुक्ति मिल जाती है:- पंडित प्रशांत महाराज
बृजेश खंडेलवाल की खास रिपोर्ट
भागवत कथा के चौथे दिन की कथा में नवधा भक्ति एवं गजेंद्र मोक्ष वामन अवतार एवं माता-पिता की महिमा का गान किया गया।
बेटमा में बढ़ाया परिवार द्वारा भगवत गीता कथा के चौथे दिन पंडित प्रशांत महाराज ने गजेंद्र मोक्ष की कथा का वर्णन करते हुए कहां है मनुष्य अगर भगवान की भक्ति नहीं कर सकता है तो भगवत के भक्ति का चरण पकडने मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान की कथा में आकर बैठने मात्र से चाहे वह निद्रा आसन में हो या मन कहीं भी सांसारिक जीवन में लगा हो सत्संग में आकर बैठने मात्र से उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। बेटमा जिला इंदौर के बढ़ाया परिवार द्वारा भागवत कथा का आयोजन स्थानीय जगदीश वाटिका में कराया जा रहा है जिसके चतुर्थ दिवस में पंडित प्रशांत महाराज ने बताया जो भागवत कथा का श्रवण मात्र करने से उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। कथा में सुखदेव जी महाराज कहते हैं ग्रस्थ जीवन सबसे बड़ा स्थान है जिसे पाने के लिए ग्रस्थ होना आवश्यक है। कथा में राजा बलि के जीवन का विस्तार से वर्णन किया गया। समुद्र मंथन में दैत्य और भगवान के बीच युद्ध एवं सामंजस्य की स्थिति का भी विस्तार से वर्णन किया गया।
ग्यारस का व्रत शरीर को शुद्ध करता है और तुलसी की माला जीवन को तार देती है
पंडित प्रशांत महाराज ने कथा के मध्य में कहा 15 दिनों में एक बार ग्यारस का दिन होता है महीने में दो बार हमें ग्यारस का व्रत अवश्य करना चाहिए और गले में तुलसी की माला धारण करना चाहिए। सारांश में पंडित प्रशांत महाराज ने कहा जिस तरह से हम डॉक्टर के पास जाते हैं और डॉक्टर हमें दवाइयां देकर हमारे शरीर से कष्ट को दूर करता है वैसे ही 14 दिनों तक जो हम नित्य भोजन ग्रहण करते हैं और 15 दिन ग्यारस का उपवास करने मात्र से हमारा शरीर शुद्ध हो जाता है इस प्रकार हम भगवान को किसी भी प्रकार के प्रसादी का भोग लगाते हैं जिसमें तुलसी का पत्ता डालने मात्र से भगवान प्रसाद की प्राप्ति कर लेते हैं ठीक उसी प्रकार मनुष्य तुलसी की माला अपने गले में धारण कर ले भगवान उसे प्राप्त कर लेते हैं।
कृष्ण जन्म एवं उत्सव
कृष्ण जन्म उत्सव की कथा का वृतांत सुनते हुए पंडित प्रशांत महाराज ने कृष्ण जन्म के अवसर पर सुंदर भजनों से कृष्ण जन्म उत्सव मनाते हुए पूरे पंडाल मैं आनंद उत्सव जैसा माहौल उत्पन्न कर दिया महिलाएं पुरुष बच्चे इस खुशनुमा माहौल में इस तरह रम गए कृष्ण जन्म आज ही जगदीश वाटिका की पावन भूमि पर मथुरा वृंदावन जैसा माहौल निर्मित कर दिया।


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