जावेद खान थांदला 9424860555
इस वर्ष गुड फ्राइडे 3 अप्रैल, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और भावनात्मक होता है। मान्यता के अनुसार, इसी दिन प्रभु ईसा मसीह को कठोर शारीरिक यातनाएं देने के बाद सूली पर चढ़ाया गया था।
यही कारण है कि इस दिन को ईसाई समुदाय शोक दिवस के रूप में मनाता है। गुड फ्राइडे को ब्लैक फ्राइडे, होली फ्राइडे और ग्रेट फ्राइडे के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व हर वर्ष ईस्टर संडे से पहले आने वाले शुक्रवार को मनाया जाता है।
गुड फ्राइडे का इतिहास और महत्व।
नाम भले ही “गुड फ्राइडे” है, लेकिन यह दिन गहरे दुख और संवेदना से जुड़ा हुआ है। यह दिन प्रभु ईसा मसीह के प्रेम, त्याग और बलिदान को याद करने का अवसर है।
ईसा मसीह ने मानवता, एकता, भाईचारे, अहिंसा और शांति का संदेश दिया। उनके उपदेशों से प्रभावित होकर लोग उन्हें परमेश्वर का पुत्र मानने लगे थे।
लेकिन समाज में फैले अंधविश्वास और कुछ स्वार्थी धर्मगुरुओं को उनकी बढ़ती लोकप्रियता से खतरा महसूस हुआ। उन्होंने ईसा मसीह को झूठा ठहराते हुए रोमन शासक पोंटियस पिलातुस के सामने उनके खिलाफ आरोप लगाए।
ईसा मसीह पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया और अंततः उन्हें सूली पर चढ़ाने का आदेश दिया गया। कई यातनाओं के बाद उन्हें कीलों से बांधकर सूली पर लटका दिया गया।
गोलगोथा: बलिदान का पवित्र स्थल।
बाइबिल के अनुसार, जहां प्रभु ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया, उस स्थान को गोलगोथा कहा जाता है। यह एक ऊंचा टीला था।
अपने अंतिम क्षणों में प्रभु ईसा ने परमपिता परमेश्वर को पुकारते हुए कहा—
“हे पिता, मैं अपनी आत्मा तुझे सौंपता हूं।”
और इसके साथ ही उन्होंने अपने प्राणों का त्याग कर दिया।
3 बजे क्यों बुझाई जाती हैं मोमबत्तियां?
गुड फ्राइडे के दिन दोपहर 3 बजे चर्चों में विशेष प्रार्थना की जाती है। इसके पीछे गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है—
कहा जाता है कि प्रभु ईसा को लगभग 6 घंटे तक सूली पर लटकाया गया।
अंतिम 3 घंटों में चारों ओर अंधकार छा गया
ठीक 3 बजे उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए
इसी घटना की स्मृति में:
चर्च की रोशनी धीरे-धीरे कम की जाती है
सभी मोमबत्तियां बुझा दी जाती हैं
घंटियां नहीं बजाई जातीं
यह अंधकार प्रभु ईसा के बलिदान और उनके अंतिम क्षणों का प्रतीक माना जाता है।
श्रद्धा, शांति और सादगी का दिन।
गुड फ्राइडे पर चर्चों में गहरा सन्नाटा और शांति रहती है। श्रद्धालु विशेष प्रार्थनाएं करते हैं और प्रभु ईसा के बलिदान को याद करते हैं।
यह दिन हमें प्रेम, त्याग, क्षमा और मानवता का संदेश देता है—जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था।

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